National Research Seminar in Hindi & Commerce Department on 08 Feb 2020

National Research Seminar in Hindi & Commerce Department on 08 Feb 2020

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महात्मा गाँधी शा कला एवं विज्ञान स्नातकोत्तर महाविद्यालय खरसिया में दिनांक ०८ फ़रवरी २०२० को राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी आयोजित की गयी. हिंदी विभाग के द्वारा आयोजित संगोष्ठी का विषय “आधुनिक कालीन हिन्दी साहित्य में नारी-अस्मिता का धरातलीय सच” था. इसके संयोजक डॉ रमेश टंडन, सह संयोजक श्री दिनेश संजय एवं श्री विनोद जांगडे तथा कोषाध्यक्ष श्री जय राम कुर्रे थे. इस अवसर पर डॉ रमेश टंडन सम्पादित उक्त शीर्षक की शोध किताब(ISBN-978-81-944420-2-3) का विमोचन भी किया गया. पुस्तक में उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, ओड़िसा, झारखण्ड व छत्तीसगढ़ के विद्वानों के शोध पत्र समाहित है. प्रसिद्ध रंगकर्मी, साहित्यकार विदुषी डॉ उषा वैरागकर आठले ने विषय का भली भांति प्रतिपादन किया. तकनीकी  सत्र में पेरिस (फ्रांस) से सम्मानित लेखक  श्री राजेंद्र मौर्य जी ने विषय विशेषज्ञ के रूप में  सभा को सम्बोधित किया. डॉ. स्वामी राम बंजारे, डॉ. प्यारेलाल आदिले का भी उद्बोधन हुआ. मंच सञ्चालन प्रो जयराम कुर्रे ने किया. संगोष्ठी के दौरान टापर रत्ना महेश्वरी व शोभा राजपूत का कुलपति महोदय  ने श्वेत वसन व बैच से सम्मानित किया.

वाणिज्य विभाग के द्वारा “छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाएँ” विषय पर राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी आयोजित की गयी. इसके संयोजक प्रो मनोज कुमार साहू जी थे. कोषाध्यक्ष प्रो पवन कुमार चेतानी थे एवं सह संयोजक प्रो एम एल धीरही, डॉ पी एल पटेल, डॉ सुशीला गोयल, प्रो रीता सिंह, प्रो एस के इजारदार, श्री मनोज बरेठा थे. मंचासीन अतिथियों के द्वारा सोवेनिअर को विमोचन किया गया. तकनीकी  सत्र में  डॉ एल एन वर्मा, डॉ राकेश डेढ़ गवे , प्रो बी के पटेल, डॉ. आनंद शर्मा, प्रो अर्चना आसटकर का उद्बोधन हुआ. मंच सञ्चालन प्रो शिवानी शर्मा ने किया.

राज्य गीत व अतिथियों का विभागीय श्वेत वसन  के द्वारा स्वागत के बाद मुख्य अतिथि के रूप में अटल बिहारी वाजपेयी विवि बिलासपुर के माननीय कुलपति प्रो जी डी शर्मा जी का सारगर्भित उद्बोधन हुआ. बस्तर विवि के पूर्व कुलपति डॉ एन डी आर चंद्रा जी का भी उद्बोधन हुआ. महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ पी सी घृतलहरे ने संगोष्ठी की अध्यक्षता की. अन्य गणमान्य अतिथियों में श्री सुनील शर्मा जी, बृजेश राठोर आदि थे. आभार प्रो एम एल धीरही ने किया.